Ankit Bhatt
Drama
सन्नाटे भरे इन रास्तों में
जान अभी बाकी है।
कोरोना से जीतेंगे हम जंग,
ये आशा की किरण जागी है
मत ड़रो डट के रहों घरों के अंदर
कोरोना का अंत होना अभी बाकी है।
आरोपी का महिम...
अंत होना अभी ...
कोरोना अब बस ...
भर दीजिए उदासियों में प्यार की महक- चेहरे पे हंसी बनके सब के मुस्कुराइए। भर दीजिए उदासियों में प्यार की महक- चेहरे पे हंसी बनके सब के मुस्कुराइए।
दिल हमारा चोरी करके, तुम कहां चले गये? दिल हमारा चोरी करके, तुम कहां चले गये?
क्यूँ कि हर दर्द देकर तुमने ... मुस्कुराते रहने की दुआ जो दी थी......... क्यूँ कि हर दर्द देकर तुमने ... मुस्कुराते रहने की दुआ जो दी थी.........
अंबर तक उड़ चले सतरंगी गुलाल l नहीं रहा किसी के मन में कोई मलाल l अंबर तक उड़ चले सतरंगी गुलाल l नहीं रहा किसी के मन में कोई मलाल l
हम भी सीखे इन रंगों के सुंदर त्योहार से। खुशियों के रंग भरें हम भी सबके जीवन में। हम भी सीखे इन रंगों के सुंदर त्योहार से। खुशियों के रंग भरें हम भी सबके जीवन ...
जब भी चाहूं मैं कुछ कहना ये शब्द कहीं गुम जाते हैं जब भी चाहूं मैं कुछ कहना ये शब्द कहीं गुम जाते हैं
मेरी महेबूबा बन ज़ाओ "मुरली", तेरे ईश्क में ड़ूबना चाहता हूं। मेरी महेबूबा बन ज़ाओ "मुरली", तेरे ईश्क में ड़ूबना चाहता हूं।
दहक -दहक दहकने लगे पलाश कि होली आई है l दहक -दहक दहकने लगे पलाश कि होली आई है l
होता एक छोटा सा आशियाना अपना आशियाने में शोर बस खुशियों का होता होता एक छोटा सा आशियाना अपना आशियाने में शोर बस खुशियों का होता
बाहर कदम रखने की ख्वाहिश अब मर चुकी है। बाहर कदम रखने की ख्वाहिश अब मर चुकी है।
जिजा अहिल्या झांसी जैसी शूर विरांगना हूं....! जिजा अहिल्या झांसी जैसी शूर विरांगना हूं....!
वाहवाही और झूठी शाबाशियों में गुम, मैं काबिल तो था पर शायद सयाना न था।। वाहवाही और झूठी शाबाशियों में गुम, मैं काबिल तो था पर शायद सयाना न था।।
देख न तो एक बार मुझे ये चूड़ी कितनी प्यारी रे, चूड़ी क्या ये हंसी ये आंसू सब कुछ तुझ पर देख न तो एक बार मुझे ये चूड़ी कितनी प्यारी रे, चूड़ी क्या ये हंसी ये आंसू सब कु...
प्यार में प्रेमी, एक दूजे के रंग, रंग जाते हैं, प्यार में प्रेमी, एक दूजे के रंग, रंग जाते हैं,
छेल छबिली मैं हूँ बलमा, तुं है मेरे मनका मोर। छेल छबिली मैं हूँ बलमा, तुं है मेरे मनका मोर।
सखियों संग राधा चली श्याम को रंगने l सखियों संग राधा चली श्याम को रंगने l
तन अधूरा बिन प्राण के, शान अधूरा बिन मान के, तन अधूरा बिन प्राण के, शान अधूरा बिन मान के,
कितनी कोशिश की तुम्हें सच बताने की पर तब हम तुम्हारे लिए अनजान साए थे। कितनी कोशिश की तुम्हें सच बताने की पर तब हम तुम्हारे लिए अनजान साए थे।
जीवन तेरी नाभि से सिंचित, और धमनी तेरी शोणित से, जीवन तेरी नाभि से सिंचित, और धमनी तेरी शोणित से,
क्यों आज कुछ लोग इतने अवसरवादी एवं स्वार्थी बन चुके हैं ? क्यों आज कुछ लोग इतने अवसरवादी एवं स्वार्थी बन चुके हैं ?