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Praveen Gola

Romance

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Praveen Gola

Romance

अनोखी यात्रा

अनोखी यात्रा

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घूम के वादियों में ,फिर यहीं जमीं पे ,तेरा हाथ पकड़ के ,चल चलें कहीं पे।

कभी स्वर्ग की यात्रा ,कभी तारों की नगरी में ,बादलों के बीच जा ,फिर झाँक लें जमीं पे।

कभी परियाँ मिले गलियाँ ,कभी चन्दा पे आँखें मींचे ,तेरे साथ हर कदम ,हम बहकें जब तू खींचे।

घूम के वादियों में ,फिर यहीं जमीं पे ,तेरा हाथ पकड़ के ,चल चलें कहीं पे।

कभी समुद्र में डूब ,हम दोनो करें बातें ,भ्रमण की ऐसी याद में ,हजारों बितायें रातें।

पृथ्वी , पाताल और आकाश में ,हो अपने सपनो का डेरा ,

ऐसी अनोखी यात्रा का ,हो ना कोई सवेरा।

घूम के वादियों में ,फिर यहीं जमीं पे ,तेरा हाथ पकड़ के ,चल चलें कहीं पे।|



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