अनन्त काल से
अनन्त काल से
अनन्त काल से वेद पुराण
रामायण महाभारत के
आदर्श पात्रों के चरित्र
प्रभावित कर रहे जन जीवन को।
हिन्दी साहित्य संस्कृत साहित्य
समृद्ध है पुराण कथाओं के पात्रों से
भारवि का किरातार्जुनीयम्
श्रीहर्ष का नैषधेय चरितम्।
महाकवि माघ का शिशुपाल वध
कालिदास का अभिज्ञान शाकुन्तल
संस्कृत के मूर्द्धन्य कवियों ने
पौराणिक चरित्रों पर काव्य लिखे।
घटनायें व्यतीत होने के बाद
दन्तकथा और पुराण बनने लगती हैं,
बीती घटनाओं पर इतिहास
अपनी झिलमिली डाल देता है।
जिससे वे नहीं दिखती स्पष्टतया
और कल्पना को तीव्र बनाती हैं,
उत्सुकता में प्रेरणा भरती हैं
स्वप्नों की गॉंठ खोलती हैं।
घटनाओं का अर्थ वही पकड़ता
जिसकी कल्पना सजीव हो
कल्पना का चित्र खंडित नहीं होता
कल्पना मन में बस जाती है।
भारत की सामासिक संस्कृति को
पौराणिक गाथा प्रभावित करती,
विषय इनके अत्यन्त विशाल हैं
सब मानवीय व्यापार दायरे में आते।
पुराणों पर संस्कृति की गहरी छाप है
ये हमको सरस भाषा में बतलाती हैं,
ज़िन्दगी केवल आर्थिक विकास नहीं
परोपकार और गुण उससे कहीं ऊँचे हैं।
