STORYMIRROR

डॉ. रंजना वर्मा

Abstract

3  

डॉ. रंजना वर्मा

Abstract

अनकहे रिश्ते

अनकहे रिश्ते

1 min
319

जिंदगी की आपाधापी में

काम की व्यस्तता में

जीवन समरसता में

कंधे पर टँगे बोझ से

अदेखे दायित्व

स्वार्थपरता

हल करते

व्याकरण

लाभ हानि का 

ठहरी हुई भावनाएँ

नीरस कर देती हैं

जीवन के क्षण

मिक्त देती हैं 

जीवंतता का उल्लास

शेष रह जाती है

निर्मल स्नेह की 

अमिट प्यास ।

ऐसे में 

गमकती सोनजुही की

महकती खुशबू से

सहला जाते हैं

हर लेते हैं

अंतर्मन की वेदना

स्वार्थरहित

केवल 

अपनत्व की चाशनी से 

सराबोर करते

अनन्त काल तक

बांधे रखते हैं

अनदेखे बन्धन से

कुछ अनकहे रिश्ते ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract