STORYMIRROR

Shyama Sharma Nag

Inspirational

4  

Shyama Sharma Nag

Inspirational

अनकहे लम्हे..........

अनकहे लम्हे..........

1 min
234


त्राहिगत रात है 

दिन जैसे आघात है

खोया-बचा साथ है

दहशतों का दौर है

हर ओर शोर है 

घटा घनघोर है 

ज़िंदगी का सूरज 

छुपा है जैसे चोर है

फिर भी -

दिशा-दिशा हुंकार है

उम्मीदों की झंकार है

दिल की यह पुकार है

अँधेरा छँटेगा 

कोहरा हटेगा

सूरज चमकेगा

धूप खिलेगी 

उजली सुबह फिर होगी

ज़िंदगी पहले से ज़्यादा हसीन होगी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational