STORYMIRROR

Richa Bharti

Romance

3  

Richa Bharti

Romance

अनजाना सफर

अनजाना सफर

1 min
290

सच कहूँ तो हमारा सफर

सच में अनजाना है

तुझे पाने की चाह नहीं मुझ में

फिर भी क्यों तुझे खोने से डरती हूँ

इसलिए तो कहती हूँ

सफर अनजाना है

ये दिल बेगाना है


पर शायद कहीं न कहीं

तू मुझे अपना सा लगता है

मंज़िल का पता नहीं

पर मेरी इबादत सच्ची है

तुझे शायद खबर भी नहीं


तू किसी की दुआओं का

हिस्सा है

तू किसी के अनजाने

सफर की मंज़िल है

तू सुकुन है

तू मंज़िल है

तू मेरी इस अधूरी कविता का

पूरा हिस्सा है। ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance