Richa Bharti
Abstract
मन करता है
उड़ती रहूं परिंदों की तरह।
मंडराती रहूं भंवरों की तरह।
पर ऐ निश्छल मन
वक्त की सुई को देख।
शाम ढलने को आई है
परिदें भी घर को लौट चले हैं।
आ तू भी अब लौट चल
रात के चकाचौंध से
सुबह के उजाले में
सपनों की सैर से
हकीकत की दुनिया में।
रिश्तों की पो...
पत्र जो लिखा ...
अनकही दोस्ती
अनजाना सफर
कहानी बिहार क...
मन
प्राकृतिक आपद...
बस फर्क यही आया है कि आज कल हो गया और कल आज हो गया बस फर्क यही आया है कि आज कल हो गया और कल आज हो गया
मुस्कान लिए जा रही है वापस एक नई जिंदगी के साथ। मुस्कान लिए जा रही है वापस एक नई जिंदगी के साथ।
वहां का पत्ता पत्ता मन को खूब आकर्षित करता था पुष्पों को निहारते निहारते मन कभी न थक वहां का पत्ता पत्ता मन को खूब आकर्षित करता था पुष्पों को निहारते निहारते मन ...
उन वीरों के सपनों का भारत आज कहीं है दूर पड़ा, उन वीरों के सपनों का भारत आज कहीं है दूर पड़ा,
सागर का गर्जन है इसमें ज्वालामुखी भी धधकता इसमें। सागर का गर्जन है इसमें ज्वालामुखी भी धधकता इसमें।
धीरे धीरे अब मेरी आंखे बन्द हो रही हैं लगता है अब मुझको सोना चाहिए! धीरे धीरे अब मेरी आंखे बन्द हो रही हैं लगता है अब मुझको सोना चाहिए!
इसीलिए मुझे पुरूष नहीं बनना है विधाता की श्रेष्ठ रचना ही बने रहना है। इसीलिए मुझे पुरूष नहीं बनना है विधाता की श्रेष्ठ रचना ही बने रहना है।
देवता का दोष क्या वो मंदिरों में है घिरा पसंद फूल आ गया जो पाँव में प्रथम गिरा! देवता का दोष क्या वो मंदिरों में है घिरा पसंद फूल आ गया जो पाँव में प्रथम गि...
समय का दैत्य जीवन की रेती पर निःशब्द………… अपने पदचिन्ह छोड़ रहा है! समय का दैत्य जीवन की रेती पर निःशब्द………… अपने पदचिन्ह छोड़ रहा है!
छांव में अपने ममता के आँचल में मुझे समेत लो माँ, मेरी आवाज सुनो माँ। छांव में अपने ममता के आँचल में मुझे समेत लो माँ, मेरी आवाज सुनो माँ।
जो तुमने दिया वो कैसे भूला दूँ। वो मीठी मीठी यादें ज़हन से कैसे मिटा दूँ। जो तुमने दिया वो कैसे भूला दूँ। वो मीठी मीठी यादें ज़हन से कैसे मिटा दूँ।
कभी चतुराई से किसी को अपना कर कभी किसी को अपना बना कर। कभी चतुराई से किसी को अपना कर कभी किसी को अपना बना कर।
उल्फ़त में दूरी है, फुरक़त नहीं है, बेवफ़ाई मेरी तो फ़ितरत नहीं है। उल्फ़त में दूरी है, फुरक़त नहीं है, बेवफ़ाई मेरी तो फ़ितरत नहीं है।
कितना अच्छा हो....... इन सब को दरकिनार करें और सीधे सरल विचार करें कितना अच्छा हो....... इन सब को दरकिनार करें और सीधे सरल विचार करें
जैसे बहता पानी पहुंचे अचानक किसी सूखे अनदेखे प्यासे रेगिस्तान में। जैसे बहता पानी पहुंचे अचानक किसी सूखे अनदेखे प्यासे रेगिस्तान...
वो रेत के खेल, आज तक जिंदा है, जिसमें खुद के घर, गाड़ियां छोड़ आये थे वो रेत के खेल, आज तक जिंदा है, जिसमें खुद के घर, गाड़ियां छोड़ आये थे
हरी चुनर सजी धरती, सभी के मन को भाए हैं।। हरी चुनर सजी धरती, सभी के मन को भाए हैं।।
एक दिन पैसे ने धर्म से कुछ यूं कह दिया, ये जहां है मेरा तेरा मोल है क्या! एक दिन पैसे ने धर्म से कुछ यूं कह दिया, ये जहां है मेरा तेरा मोल है क्या!
धरती सी गहराई उसमें अम्बर सी ऊँचाई है, उसकी पावन ममता में सागर सृष्टि समाई है। धरती सी गहराई उसमें अम्बर सी ऊँचाई है, उसकी पावन ममता में सागर सृष्टि समाई है...
अनुमान से नजर तक आप रखिए हिसाब आ जरा लौट चलें। अनुमान से नजर तक आप रखिए हिसाब आ जरा लौट चलें।