Chandra prabha Kumar
Fantasy
परहित फटा मैं
चुगने दिये दाने अपने,
चुग चुग दाने उड़ गई चिड़िया
स्वार्थ की है दुनिया।
जब तक है मतलब,
सब आते पास।
पूरा हुआ मतलब,
कोई न रहता पास।
लिये खोखले अनार,
खड़ा अब मैं एकाकी,
फिर भी सौन्दर्य है भरपूर,
निष्काम सुख दुख से दूर।
हाइकु
सूरज
चेतना विस्तार
श्रीप्रभु के ...
आ बरसो मेघा
आज रक्षाबन्धन
जन जन का प्या...
अमृत महोत्सव
प्रिय मेरा
ऑंवले का वृक्...
फूल फूल में ख़ुशबू थी, हवा में नई सुवास भरी थी फूल फूल में ख़ुशबू थी, हवा में नई सुवास भरी थी
मैं खुदा पर एतबार कर रही थी पर खुद को सबसे बड़ा बताया है तूने मैं खुदा पर एतबार कर रही थी पर खुद को सबसे बड़ा बताया है तूने
मैं वो हवा नहीं हूँ जो हर गली से ग़ुजरे, तेरी गली में मेरी सास का बसर रहेगा। मैं वो हवा नहीं हूँ जो हर गली से ग़ुजरे, तेरी गली में मेरी सास का बसर रहेगा।
अगर ऐसी बात है बाहों में छुपा लो देखा जायेगा जो होगा हो जाने दो। अगर ऐसी बात है बाहों में छुपा लो देखा जायेगा जो होगा हो जाने दो।
उस तरह आपका स्वागत करते भारत की अयोध्या नगरी से। उस तरह आपका स्वागत करते भारत की अयोध्या नगरी से।
तुम सामने क्या आये नज़र जीवन व्यथा तर्कहीन हो गया। तुम सामने क्या आये नज़र जीवन व्यथा तर्कहीन हो गया।
हार ही सही हार वाली जीत आने दो उदासियों के तल्ख़ में बीत जाने दो ! हार ही सही हार वाली जीत आने दो उदासियों के तल्ख़ में बीत जाने दो !
भूल पाता नहीं अब तो आपका मुड़कर मुझे देखना। भूल पाता नहीं अब तो आपका मुड़कर मुझे देखना।
आनंद की आतिशबाज़ी पूरी फिज़ा में बिखर रही। आनंद की आतिशबाज़ी पूरी फिज़ा में बिखर रही।
हर तरफ घुला मधुर गीत माँ शारदा का मिला जब वरदान। हर तरफ घुला मधुर गीत माँ शारदा का मिला जब वरदान।
प्रदूषण को कम है करना, प्रकृति को है बचाना। प्रदूषण को कम है करना, प्रकृति को है बचाना।
मन को मदहोश बना जाये।। हुश्न-ओ- दुनिया की जैसे हुकुमत है वो। मन को मदहोश बना जाये।। हुश्न-ओ- दुनिया की जैसे हुकुमत है ...
मेरी आस, मेरे पास मेरे खास, मेरे पास मेरी आस, मेरे पास मेरे खास, मेरे पास
या फिर एक घिस-पीटी बेबुनियाद सी एक परम्परा या फिर एक घिस-पीटी बेबुनियाद सी एक परम्परा
वो कहते हैं एक महापुरुष आज दुनिया में आया है वो कहते हैं एक महापुरुष आज दुनिया में आया है
एक पुरानी दास्ताँ दुनिया की भीड़ में जैसे ओस पानी में घुल गया। एक पुरानी दास्ताँ दुनिया की भीड़ में जैसे ओस पानी में घुल गया।
अपने लिखने के अंदाज़ को अपने अंदर छुपे अल्फाजों को। अपने लिखने के अंदाज़ को अपने अंदर छुपे अल्फाजों को।
आ गया बसंत, मन में जागती कल्पनाएं अनंत। आ गया बसंत, मन में जागती कल्पनाएं अनंत।
हुस्न बेमिसाल तेरा जानम फरमान यह सुना जाती है।। हुस्न बेमिसाल तेरा जानम फरमान यह सुना जाती है।।
धुंधला दिखता मुझे सवेरा जब जाती नहीं आँखों से सूरत तेरी धुंधला दिखता मुझे सवेरा जब जाती नहीं आँखों से सूरत तेरी