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Ashu Kapoor

Abstract Tragedy

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Ashu Kapoor

Abstract Tragedy

अकेलापन

अकेलापन

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ये अकेलापन भी,

क्या खूब है---

ना कोई उम्मीद, 

ना किसी का इंतज़ार, 

बस आप ही आप---


अपने ही साथ !

ना कोई आरजू,

ना कोई जुस्तजू,

ना कोई परेशानी,

ना कोई पशेमानी,

ना दुनिया के झमेले,

ना रंज-ओ- गम के मेले,

बस अपने आप में ही व्यस्त हूँ, 

 खुश हूँ या त्रस्त हूँ, 


ये अकेलापन भी

क्या खूब है---

कभी वरदान है,

तो कभी अभिशाप है,

कहने को दुनिया ये---

बड़ा सा मेला है,

पर इस भारी भीड़ में भी--


हर शख्स अकेला है

अपनी ही दायरों 

के अंदर--- गोल- गोल

घूमते -घूमते,

अपने अंजाम तक

पहुंच जाता है---

ये अकेलापन भी

क्या खूब है !


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