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Govind Narayan Sharma

Romance

4  

Govind Narayan Sharma

Romance

अजीब दास्तान

अजीब दास्तान

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यह दिल भी अजीब है कभी कुछ छुपाता नहीं ,

छोटी छोटी बात का फ़साना कभी बनाता नहीं!

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हद से बात बिगड़ जाए सर पे जब यह चढ़ जाए,

फिर मत पूछो कुछ यारों बस में रह जाता नही!

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कुछ बीज बो दें धरा में जो प्रेम से भर दे जहां को,

हर ओर बहे प्रेम की हवा ऐसा बना दें शमा को!

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जब रंग इश्क का चढे ख्वाहिशें शौकीन हो जाती हैं,

दिल में दिलबर बसे तो सारा जहान रंगीन लगता है!

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चलो आज हम मिलकर इक वादा करते हैं, 

दिल हमारा तुम रख लो हम तुम्हे रख लेते हैं!

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एक ऐसी आग लगी बदन में न जीने दे न मरने दे,

चुप रहूँ तो कलेजा जले बोलूँ तो तेरे वादे कसमें हैं!

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हर रंग लग गया देह पर फिर भी तन हुआ न लाल,

जब मिली नजर तुमसे मेरा रोम रोम भया गुलाल!



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