ऐ वतन के नौजवान
ऐ वतन के नौजवान
ऐ वतन के नौजवान, जा रहा है तू कहाँ?
याद कर वह दास्ताँ, जिसको गाता था जहाँ ।
ऐ वतन के नौजवान..........।।
आज है तू कहाँ, क्या तेरा फ़र्ज़ है यहां?
क्या नहीं तुझे पता, जीवन नष्ट क्यों कर रहा?
क्या तू है कर रहा, देश तुम्हें निहार रहा,
खो दिया हमने वह सब, जो था हमारा अधिकार।।
ऐ वतन के नौजवान.........।।
सोच ज़रा उद्देश्य है क्या? महफ़िल बेरंग ना बना,
खो दिया सब हौसला, देश के बलिदानों का।
क़र्ज़ हमें चुकाना है, विकसित देश बनाना है।।
ऐ वतन के नौजवान..........।।
मिलकर आज हम बढ़ें, मंज़िल की ओर चलें,
वादा तुम्हें करना है, देश के लिए मरना है।
ऐ वतन के नौजवान, जा रहा है तू कहाँ?
याद करेंगे दास्ताँ, जिसको गाता यह जहाँ।।
ऐ वतन के नौजवान..........।।
भाषा-जाती सम्प्रदाय छोड़, करना है श्रेष्ठ से होड़,
उत्तम से उत्तम तर बनाना है, खोया वैभव फिर पाना है।।
