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Sandeep Kumar

Abstract Romance

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Sandeep Kumar

Abstract Romance

ऐ सनम तुम्हारी कसम तेरी यादों में खोया रहता हूं।।

ऐ सनम तुम्हारी कसम तेरी यादों में खोया रहता हूं।।

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ऐ सनम तुम्हारी कसम

तेरी यादों में खोया रहता हूं।।


ऐ सनम तुम्हारी कसम

तेरी यादों में खोया रहता हूं

जब से आया हूं तुमसे मिल

तेरी बातें में खोया रहता हूं।।


खोए खोए राज को दबाये

दिल को तड़पाया करता हूं

समय असमय फोन लगा

तुम से बतयाया करता हूं।।


यह बात हर किसी से

पल पल छुपाया करता हूं

तुम्हारे सिवा न और किसी से

दिल की बात बताया करता हूं।।


दर्दे दिल की नदी धार में

भविष्य को लाया करता हूं

सुनो तेरी यादों में रो रो कर

तकिया भिजाया करता हूं।।


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