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सीमा शर्मा सृजिता

Abstract

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सीमा शर्मा सृजिता

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ऐ दोस्त

ऐ दोस्त

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ऐ दोस्त ! तुझ पर क्या लिखूं तेरी दोस्ती ने मुझे लिखा 

ये जिंदगी कुर्बान तुझ पर 

तेरी दोस्ती में रब दिखा।


तेरी आंखों में जो पानी है 

ला उसको पी लेती हूँ मैं 

तेरी जिंदगी के दर्द को 

तू बांट जी लेती हूं मैं।


मेरा रूप है तू दूसरा 

मेरी जिंदगी की डोर है 

है रोशनी अंधेरों में 

मनमोहक सी तू भोर है।


तेरी दोस्ती से खूबसूरत 

इस जहां में कुछ नहीं 

मेरे दोस्त तेरे होने से 

जन्नत मिली मुझको यहीं।


तेरी दोस्ती जो साथ है 

दुनिया को जीत लूंगी मैं 

मेरी रूह से तू जुड़ गया 

तेरे साथ -साथ चलूंगी मैं।


लिखेगी सृजिता गीत एक 

इस दोस्ती के नाम पर 

गायेगी जिसको ये दुनिया 

महफिलों की शाम पर।

 


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