STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

2  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

अहम

अहम

1 min
112

सबको तो अहम ने मारा है

सबको ख़ुद के वहम ने मारा है

मौत ने तो बस इनका किया,

इस दुनिया से छुटकारा है


आज सब अहं में मरते है

सबको सांप बन डसते है

लोगों को जहर ने नहीं,

अहं के कहर ने मारा है


अहंकारी ख़ुद को ख़ुदा समझते

दूसरे सबको चींटी समझते है

अहंकारी अहं में हुआ बेचारा है

टूटा गया सबसे ही भाईचारा है


पर अहं में जीने वालों को

कभी न मिलता किनारा है

अंत में उसके पास साखी,

किसी का न होता सहारा है


   


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy