अगर ना होता चांद...
अगर ना होता चांद...
अगर ना होता चांद चमकता
रात अंधेरी गहरी होती,
तारे भी ना टिमटिम करते
सपनों से रंगत खोती रहती।
अगर ना होती चाँदनी उजली,
सागर में लहरें सोती रहती,
आँगन में छाई खामोशी होती
मन की बात भी अधूरी होती ।
चिड़ियों के गीत अधूरे होते
फूलों से खुशबू गायब होती,
ना कहानियों में परियों की बातें
शबनम भी चुप-चुप रोती रहती।
चाँद अगर ना होता साथी,
रातें भी तन्हा कटती रहती,
दिल की हसरतें दिल में होती
आशा की लौ भी थकती रहती।
चाँद का जादू जो हर दिल में
सपनों की दुनिया रचता है,
उजली किरणों की छांव तले,
प्रियशी प्रेम को तड़पता है।

