STORYMIRROR

Jyoti Naresh Bhavnani

Inspirational

4  

Jyoti Naresh Bhavnani

Inspirational

अगर आरज़ू न होती

अगर आरज़ू न होती

1 min
259


अगर आरज़ू न होती,

तो कुछ भी न होता,

मन में सभी के बस,

केवल संतोष ही होता।


न लालच ही होती,

न भ्रष्टाचार होता,

हर जगह पर केवल,

शिष्टाचार ही होता।


न कोई लड़ाई ही होती,

न झगड़ा कहीं पर होता,

सम्पति की लालच में,

न घर परिवार कोई टूटता।


न किसी से ईर्ष्या ही होती,

न कोई दगा कहीं पर होता,

हर जगह पर आपस में,

बस प्यार ही प्यार होता।


न मोह माया होती,

न अश्लील काया ही होती,

जिस्मों का कहीं भी,

कोई व्यापार न होता।


न किसी की मजबूरी का,

अनावश्यक फायदा कोई लेता,

हर जगह पर बस केवल,

कायदा कानून ही होता।


दुनिया में हर कहीं पर,

बस सच्चाई ही होती,

हर मनुष्य यहां पर,

ईमानदार ही होता।


हर देश की शायद कहीं भी ,

इतनी तरक्की न होती,

पर फिर भी अपने घरों में,

 हरकोई खुश ज़रूर ही होता।


आरज़ू से ही रचा था,

रामायण व महाभारत इक दिन,

अगर आरज़ू न होती,

तो क्यों इतना कत्लेआम होता।


है कल से लाख अच्छा,

आज का ये जीवन हमारा,

पर आरज़ुओं ने बेरंग,

इसे बेहद ही बनाया।


जो आरज़ू न होती,

तो हर तरफ सुख चैन होता,

बिन आरज़ुओं के,

ये जीवन बेहद हसीन होता।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational