अधूरी ख्वाहिश
अधूरी ख्वाहिश
अधूरी ख्वाहिश है मेरी,
पूरी न हो सकी अब तक,
जैसे कोई अधूरा सा सपना,
जो ख्वाबों से न उतर सका।
हर बार जब मैं उठता हूं,
उसी ख्वाहिश के साथ,
जो कहती है कि कुछ बाकी है,
जो अभी भी पूरा न हुआ अब तक।
क्या इस जिंदगी में कुछ अधूरा छोड़ जाना,
ही जिंदगी का मतलब है?
या हर अधूरी ख्वाहिश को पूरा करने की चाहत में,
मैं अपनी जिंदगी को भूल रहा हूं?
मेरी अधूरी ख्वाहिश के साथ,
मैं चलता हूं अपनी जिंदगी के साथ,
जानता हूं कि शायद कुछ बाकी हो जाए,
पर फिर भी जीता हूं अपने ख्वाबों के साथ।
ज़िन्दगी भर रहती है एक अधूरी ख्वाहिश,
जो कभी पूरी नहीं होती, जब तक
सांसें होती हैं तब तक जीते रहो तुम।
कुछ लोग ये सोचते हैं कि सब कुछ
पाकर हमारी ख्वाहिशें पूरी हो जाती हैं,
लेकिन जब हम सब कुछ पा लेते हैं,
तब भी कुछ न कुछ बचा हुआ रह जाता है।
हर इंसान के अंदर एक ख्वाहिश होती है,
जो उसे आगे बढ़ने की स्फूर्ति देती है।
कभी वो ख्वाहिश पूरी नहीं होती,
लेकिन फिर भी उसके लिए लड़ते रहना ज़रूरी है।
जब भी तुम्हारी अधूरी ख्वाहिशों का सामना करती हूँ,
दिल में एक अजीब सा दर्द सा होता है।
आँखों में एक ख्वाब सा उठता है,
जो कभी पूरा नहीं हो पाता है।
कभी कभी लगता है कि सारी दुनिया अपनी होती है,
लेकिन फिर भी कुछ न कुछ बाकी रह जाता है।
वो अधूरी ख्वाहिश, वो अधूरा सपना,
जो कभी पूरा नहीं हो पाता है।
जिंदगी की ये चाहत, ये तमन्ना हमेशा रहेगी,
अधूरी होती रहेगी, कुछ न कुछ तो बाकी रहेगी।
इस ख्वाहिश के साथ जीना होता है,
जो कभी पूरी नहीं हो पाती है।
