Anjali Singh
Abstract
कभी कभी अधूरी कहानियाँ भी
खूबसूरत सी लगती है और
अगर पूरी हो जाए तो सारा जहान
जगमग सितारों के तरह रौशन सा लगता है
खूबसूरत सी लगती है
खेलें होली
हम तो तेरे
बसंत ऋतु का आ...
हर हर महादेव
बेरुखी
सामान्य
मेरे लिए
हमरा सैय्या
डरावना
दोस्त
अब खड़ा हूं अकेला बेहद तन्हा एक सुकून के इंतजार में.........!! अब खड़ा हूं अकेला बेहद तन्हा एक सुकून के इंतजार में.........!!
यादें..... क्या हैं यादें..... कहाँ से आती हैं.. ज़रूरी भी हैं या नहीं? यादें..... क्या हैं यादें..... कहाँ से आती हैं.. ज़रूरी भी हैं या नहीं?
क्योंकि अपनों का साथ ही तो है, मंजिल खुशियों की। क्योंकि अपनों का साथ ही तो है, मंजिल खुशियों की।
कहां खो गए वो हँसीन पल क्यों गुजर गए बचपन के कल. कहां खो गए वो हँसीन पल क्यों गुजर गए बचपन के कल.
चढा रहा श्रद्धा पुष्प तुमको समर्पित कर श्री गुरु चरणों में । चढा रहा श्रद्धा पुष्प तुमको समर्पित कर श्री गुरु चरणों में ।
प्रतीक जीवंत हो उठे हैं और जीवंतता इतिहास की तरफ सरक रही है. प्रतीक जीवंत हो उठे हैं और जीवंतता इतिहास की तरफ सरक रही है.
महत्वाकांक्षी औरत की आंखें लाल अधर नीले होते महत्वाकांक्षी औरत की आंखें लाल अधर नीले होते
रात के अंधेरे में, सितारों और चांद के सिवाय, कोई और भी चमकता है। रात के अंधेरे में, सितारों और चांद के सिवाय, कोई और भी चमकता है।
हरियाली प्राणों की बंजर बिन प्रहार जब चुभते खंजर हरियाली प्राणों की बंजर बिन प्रहार जब चुभते खंजर
छुपाते हैं लोग प्रेम को बदनामी की तरह, वो प्रेम ही क्या...? छुपाते हैं लोग प्रेम को बदनामी की तरह, वो प्रेम ही क्या...?
सच झूठ से ऊंचा, फिर भी सच का उड़ता मज़ाक, सच की खामोशी को दबा रहा है झूठ की आवाज़, सच झूठ से ऊंचा, फिर भी सच का उड़ता मज़ाक, सच की खामोशी को दबा रहा है झूठ की आ...
मेघ देखूं ,जल देखूं, दर्पण देखूं हाथों के कंगन खनकते, संवरते, और टूट जाते मेघ देखूं ,जल देखूं, दर्पण देखूं हाथों के कंगन खनकते, संवरते, और टूट जाते
छुपे मुझमें ही कहीं बनकर मेरी एक अनलिखी_कविता। छुपे मुझमें ही कहीं बनकर मेरी एक अनलिखी_कविता।
तू निज वृत्ति का स्वामी बन, मन घन तम ना गहन व्याप्त हो। तू निज वृत्ति का स्वामी बन, मन घन तम ना गहन व्याप्त हो।
बहुत कराहते हैं हम संसार ने हमें क्या दिया? बहुत कराहते हैं हम संसार ने हमें क्या दिया?
अमावस की रात जगमग हो और सुबह हो अमावस की रात जगमग हो और सुबह हो
देह तो एक पड़ाव है इस पर ठहरे लोग नहीं पा सकते प्रेम देह तो एक पड़ाव है इस पर ठहरे लोग नहीं पा सकते प्रेम
रिश्तों में अगर दर्द है तो खुशी भी तो रिश्तो में ही समाया है। रिश्तों में अगर दर्द है तो खुशी भी तो रिश्तो में ही समाया है।
मोह में डूबा मन विवेक खो देता मोह में डूबा मन विवेक खो देता
देह पर हक है प्रेम का प्रेम को चाह नहीं देह की देह पर हक है प्रेम का प्रेम को चाह नहीं देह की