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Dhan Pati Singh Kushwaha

Inspirational

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Dhan Pati Singh Kushwaha

Inspirational

अधिकार या कर्त्तव्य

अधिकार या कर्त्तव्य

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प्रिय डायरी लेखन के क्रम में,

सबको आते हैं यही विचार,

करना सबको पड़े न्यूनतम,

मगर भरपूर मिलें अधिकार


क्या- कितने- कब-कैसे,

मिलेगें हमारे हमको सब अधिकार ?

यही प्रश्न कर्त्तव्य पूर्ति हित सोचें तो,

सुखमय हो जाएगा संसार।


नहीं मिला जो मिलना था हमको,

हर पल तृण का रखते हैं ध्यान,

चूक न हो जो करना है हमको,

कर्त्तव्य निभाने की अपनी है शान।


निर्देश -उल्लंघन है फितरत कुछ की,

चाहे खतरे में भी आ जाए जान,

वैश्विक विपदा के भी पलों में भी ये हरकत,

हम कैसे मानें इनको इंसान ?


"पृथ्वी दिवस" के शुभ अवसर पर,

दोनों हाथ जोड़कर आप सभी का है आह्वान,

कर्त्तव्य निभाएं रह निज घर में रह,

सेवारत कोरोना योद्धाओं का करें बहुत सम्मान।


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