अधिकार या कर्त्तव्य
अधिकार या कर्त्तव्य
प्रिय डायरी लेखन के क्रम में,
सबको आते हैं यही विचार,
करना सबको पड़े न्यूनतम,
मगर भरपूर मिलें अधिकार
क्या- कितने- कब-कैसे,
मिलेगें हमारे हमको सब अधिकार ?
यही प्रश्न कर्त्तव्य पूर्ति हित सोचें तो,
सुखमय हो जाएगा संसार।
नहीं मिला जो मिलना था हमको,
हर पल तृण का रखते हैं ध्यान,
चूक न हो जो करना है हमको,
कर्त्तव्य निभाने की अपनी है शान।
निर्देश -उल्लंघन है फितरत कुछ की,
चाहे खतरे में भी आ जाए जान,
वैश्विक विपदा के भी पलों में भी ये हरकत,
हम कैसे मानें इनको इंसान ?
"पृथ्वी दिवस" के शुभ अवसर पर,
दोनों हाथ जोड़कर आप सभी का है आह्वान,
कर्त्तव्य निभाएं रह निज घर में रह,
सेवारत कोरोना योद्धाओं का करें बहुत सम्मान।
