अभयंकर
अभयंकर
शिव भोलेनाथ शंकर तुम ईश अभयंकर
तुम चन्द्र भाल धर्ता तुम सकल दुख हर्ता,
सोहे जटा बीच गंगा लिए पार्वती संगा
शिव शंभु सदा कहता मन नाम तेरा जपता,
नित भंग और धतूरा पी जाते विष वो पूरा
महाकाल हैं कहाते सब नाम तेरा जपते,
कंठे भुजंग माला पहने बाघंवर छाला
भोले हैं ताप हर्ता दुख शोक दूर कर्ता,
डम-डम-डम डमरु बाजे सब भक्त मगन नाचें
बेल-पत्र जो चढ़ाता,वहीं भक्त शिव को भाता,
हे महाकाल वंदन करती हूँ मैं अभिनंदन
कोई नहीं सोहाता तुम ही हो पिता और माता।
