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Simpy Aggarwal

Inspirational

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Simpy Aggarwal

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"आज़ादी का दिन"

"आज़ादी का दिन"

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हो आज़ादी दिवस या हो संविधान का दिन,

अधूरे है सब देशभक्ति की सच्ची भावना के बिन!

कोई एक दिन कैसे हो सीमित आज़ादी का,

आज़ादी तो हक़ है भारत की पूरी आबादी का!

हो क्षीण सोच से आज़ादी, हो दिलों से आज़ादी,

आज़ादी हो अन्याय की बेड़िओ से,

हो आज़ादी सभी बंदिशों से,

आज़ादी के दिन पर हो आज़ादी कुरीतियों से,

और हो आज़ादी सभी दल-दल बनी राज़ नीतियों से,

छोटे विचारों की सलाख़ों से आज़ादी,

भारत माता पर होते अत्याचारों से आज़ादी,

परंपरा और संस्कृति के नाम पर बने बेबुनियाद पर्दों से आज़ादी,

जो नारी का सम्मान न कर सके,

उन बुज़दिल नामर्दों से आज़ादी!

आज़ादी हो ग़रीबी से, 

हो आज़ादी दिल में छुपे फ़रेबी से!

इस बढ़ती महामारी से हो आज़ादी,

जिससे मिट सकें ये ख़ौफ़नाक बर्बादी!

बेशक़ मिल गई हो अंग्रेज़ो से तुझे आज़ादी,

पर ए मेरे देश!

तेरे कुछ अपनों ने ही लिख रखी है तेरे हिस्से में बर्बादी!

नम हैं आँखें मेरी देख कर ये हालात,

मेरे अल्फ़ाज़ उन तक पहुँचे न पहुँचे, क्या ख़बर,

अब तू ही सुना दे ऐसे बुज़दिलों को अपने ज़ज़्बात!



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