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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

"आया शरण तुम्हारी"

"आया शरण तुम्हारी"

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छोड़कर सकल ही यह दुनियादारी

आ गया बालाजी,में शरण तुम्हारी

चाहे जैसे रखो,जैसी इच्छा तुम्हारी

देना भक्ति,यह आखरी इच्छा,हमारी


यह दुनिया बहुत ज्यादा है,अहंकारी

झूठ पर टिकी हुई है,सारी दुनियादारी

सही व्यक्ति पर चलाती,रोज तलवारी

झूठ की करती,स्वार्थ खातिर,जयकारी


मुझे परवाह नही,आया शरण तुम्हारी

जब तक तेरी कृपा है,मुझ पर भारी

रुई सा हल्का लगता है,पर्वत हजारी

जो दिल से निकालता,मोह,माया,नारी


उसे मिलती बालाजी भक्ति,तुम्हारी

बालाजी,जिंदगी तुझ पर बलिहारी

जब तलक सांसे चलती रहे,हमारी

तब तलक भक्ति करता रहूं,तुम्हारी


ऐसी कृपा करना बालाजी,गदाधारी

आप सा न हुआ,कोई राम आज्ञाकारी

आपकी जय हो,हनुमत रुद्र अवतारी

आ गया,बालाजी,में शरण तुम्हारी


आपको सौंप दी,मैंने जीवन पतवारी

डुबोओ या पार उतारो,इच्छा तुम्हारी

में तो तेरी दर का हूं,एक छोटा भिखारी

लेता रहूंगा,हरपल राम नाम तारणहारी


तूझे आये,दया दृष् दे,प्यास बुझा हमारी

आपकी जय हो,पवन पुत्र महाबलकारी

तेरे नाम मात्र से धुजे कलि की बीमारी

आपने ही रखी संतन,धर्म लाज हर बारी।


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