STORYMIRROR

Neeraj pal

Abstract Inspirational

3  

Neeraj pal

Abstract Inspirational

आया हूँ तेरे दर पर।

आया हूँ तेरे दर पर।

1 min
195

आया हूँ तेरे दर पर, कुछ फरियाद को लेकर।

सत्संग की बगिया में, हर किसी को मिलती है ।।

सुनता हूँ तेरी रहमत, हमेशा बरसती है।

तुझे पाने की हसरत, दिल में पनपती है।।

घायल हूँ तेरी नजरों से, जो दिल में उतरती हैं।

तेरे दीदार को ना जाने, क्यों आंखें तरसती है।।

फ़ना होना चाहता हूँ, तेरे दरिया- ए -दिल पर।

ना जाने क्यों ये नजरें, तुमसे ना हटती हैं।।

क्या अर्ज करूँ तुमसे, हिम्मत नहीं कुछ कहने की।

फरियाद भरा यह दिल है ,जो रोके ना रूकती है।।

चाह नहीं मुझको, जो कि तुम मुझको पसंद करो।

तुम्हारी "नूरानी दौलत", हर किसी को मिलती है।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract