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Kashif Nawaz

Romance

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Kashif Nawaz

Romance

आते जाते मुझे देख वो ऐसे मुस्कुराती है

आते जाते मुझे देख वो ऐसे मुस्कुराती है

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“आते जाते मुझे देख वो ऐसे मुस्कुराती है,

इशारो इशारो में ही जैसे अपना हाल ए दिल सुनाती है,


अपनी नजरो को मेरी नजरो से कुछ ऐसे मिलाती है,

आँखों के ज़रिये ही सीधा दिल तक वो उतर आती है,


लगता है कभी तो हाथो से भी कुछ समझाती है,

जब सर पर दुपट्टे को मेरी ओर देखते हुए सजाती है,


कभी ख्याल ना करू तो पायल का शोर वो लगाती है,

अपनी मौजूदगी को वो सुरो के साथ भी सुनती है, 


कुछ पुछु मै उससे तो लब नहीं हिलाती है,

मर्ज़ी पर अपनी हंसी के ज़रिये मोहर लगाती है,


ऐसा नहीं की कभी वो गुस्से में नहीं आती है,

नाराज़गी तो ऐसी की देखते ही नाक चाडाती है,


फिर नखरे अपने भी खूब पूरे करवाती है,

जो ना मानु तो दूर से देखते ही नज़रे फिराती है,   


तरसाने की भी उसको कई कलाबाजियां आती है,

बिन देखे, बिन इशारे, सामने से सीधे गुज़र जाती है, 


मनवाने के तो लोगो को वो अनोखे हुनर पड़ाती है,

नए हुनर खुद को मनवाने के हर बार मुझे भी सिखाती है,


साथ निभाने के सपने वो हर रोज़ मुझे दिखाती है,

उसको पाने की खवाइश दिन रात मुझे तडपाती है।” 


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