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Kavita Sharrma

Inspirational

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Kavita Sharrma

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आसमान तक

आसमान तक

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दीये से पूछो जरा,

अंधेरे से वह कब डरा है 

नदी ने कभी चट्टानों के आगे

रुकना क्या स्वीकार किया है 


हवा भी सीमाओं में

बंधी न रह सकी 

मनुष्य तू भी बढ चल

अपनी शक्ति को आकार दे


मत छोड़ हौसला

मुश्किलों को मात दे 

कल्पनाओं को पर लगा कर

आसमान पर चलाचल 


आसमान तुम्हारा है

खुदा भी तुझसे यही कहे।


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