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संजय कुमार

Abstract

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संजय कुमार

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आशा की डोर

आशा की डोर

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80


मोहब्बत तो किसी तरफ से नहीं थी

ये तो केवल आशाओं की डोर है।

तुम दिल को अपने समझा सकती थी

जब पता चला उसका कोई और है।

दिल को थोड़ा दर्द होता समझ जाता

पर आप का दिल टूटने से तो बच जाता

तेरी यादों की कश्ती में हम जल गए

मेरे आँसू आँखो में ही सिमट गए।

आया था तेरे चाहतों का तूफान

फिर भी गिरते गिरते हम संभल गए।



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