पहले रिश्तों में मिठास होती थी
पहले रिश्तों में मिठास होती थी
पहले रिश्तो में मिठास होती थी
दूर होकर भी एक प्यास होती थी
प्रार्थना निकलती, दिल से
आशाएं और मिठास होती थी
अब टूटती मर्यादा,
स्वार्थ की बात होती है
बदल जाते हैं रिश्ते
जहाँ धोखे कि बुनियाद होती है
मौसम से जल्दी अब रिश्ते बदलते हैं
जिनके लिए मर मिटे अब उन्हें खटकते हैं।
प्यार समर्पण विश्वास पर टिके रिश्ते अब
सोशल मीडिया पर दिखते है।
बचाना होगा रिश्ते को आने
वाली पीढ़ी के लिए वरना नहीं होगा
बच्चों के पास मामा मामी चाचा
चाची, जीजी जीजा कहने के लिए।
रिश्तो की बिना जीवन खोखला होगा
आओ मिलकर रिश्ते बचाए
मिलकर तीज त्योहार बनाएं,
बदलते रिश्तों को बचाए।
