STORYMIRROR

Neeraj pal

Abstract

4  

Neeraj pal

Abstract

मां तेरे कदमों में।

मां तेरे कदमों में।

1 min
532

ए मां तेरे कदमों में है जन्नत मेरी

कर दे गुले गुलजार है मन्नत मेरी

तुम दूर हो या पास मगर यह सच है

है जिंदगी तुझसे ही सलामत मेरी


यह काम मेरे से हो खुशी जिसमें तेरी

ताके हो तेरे कल्ब (दिल) में चाहत मेरी

अच्छा हो अगर मैं कहीं भी काम आऊं

खिदमत है तेरी एक इबादत मेरी


मैं छोड़ दूं सारे ही जहां की खुशियां

तुझसे नहीं अच्छा कोई नैंयमत (इनामात) मेरी

किस्मत जो अगर साथ दिया

गर छोड़ा तो आ जाएगी शामत मेरी


मैं रूठ भी जाऊं तो मना ले मुझको

है तेरी मोहब्बत ही तो दौलत मेरी

ममता की बदौलत ही खफा होकर भी

हर गलती पर करना तू हिफाजत मेरी


एक आस है जिस पर मैं जिए जा रहा हूं

रंग लाएगी एक बार रफाकत (प्रेम) मेरी

दुनिया में कोई मुझको बुरा न समझे

कह दे कि हां नीरज है अमानत मेरी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract