STORYMIRROR

Deepak Srivastava

Abstract

4  

Deepak Srivastava

Abstract

तू कोई

तू कोई

1 min
398

देखूँ तुझे 

मैं खुश मिज़ाज़ हो जाऊँ

तू कोई चांदना थोड़ी है 


छू लूं तुझे 

महक सा जाऊं 

तू कोई संदल थोड़ी है 


इंतज़ार तेरा 

फिर तू लबों से छू जाये 

तू कोई जाम थोड़ी है 


पाकीज़ा तू है 

छू कर तुझे पाक होऊं 

तू कोई तुलसा थोड़ी है 


मैं वाकिफ़ 

तेरे रं -रंग से 

तू कोई खुदरंग थोड़ी है 


इबादत करुँ 

ग़र रूठे मैं मनाऊं  

तू कोई मेराज़ थोड़ी है 


करे ईलाज़ 

और मैं बे-मर्ज़ हो जाऊं 

तू कोई हकीम थोड़ी है 


बनूं भँवरा 

दिन-रात मंडराऊँ 

तू कोई महकता

गुलाब थोड़ी है 


तवज़्ज़ो दी बस 

सज़दा करुँ तुझको 

तू कोई खुदा थोड़ी है 


नाचीज़ मगरूर तू 

तेरे हुक्म पे मरुँ  

तू कोई अहबाब थोड़ी है 


तारीफ़े तमाम 

तेरे हुस्न की करुँ 

तू कोई हूर थोड़ी है 


फूल चढ़ाऊं  

तेरी मूरत बनाऊं 

तू कोई भगवान थोड़ी है 


तूने जो किया 

नज़रें कैसे तुझसे मिलाऊँ 

तू कोई इंसान थोड़ी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract