हमें गाँधी भी बनना पड़ेगा !
हमें गाँधी भी बनना पड़ेगा !
जवान सर पर कफ़न बांधकर
सरहद पर लड़ते हैं.
हम घर कि चौखट
चूमकर घर से निकलते हैं।
हमें मालूम हैं कि
आतंकवाद तो हर गली,
चौराहे पर गोड़से बन खड़ा है
हमें गाँधी भी बनना पड़ेगा,
ये सोचकर निकलते हैं।
भारत अब वो भारत नहीं रहा,
संविधान कि हर रोज
धज्जियां उड़ाई जा रही,
जाति-धर्मों के नाम पर
कब तक लड़ोगे,
हम अपने दिल से
संविधान कि प्रस्तावना
(हम भारत के लोग)
लगाकर निकलते हैं,
जवान सर पर कफ़न बांधकर
सरहद पर लड़ते हैं
हम घर की चौखट चूमकर
घर से निकलते हैं !
