आरज़ू
आरज़ू
तेरी आरज़ू में वक्त थम-सा गया है
आंसुओं का एक सिलसिला
पलकों तक आकर रुक गया है
है मुमकिन नहीं हमारा मिल पाना
फिर भी उम्मीद से चेहरा
आजकल खिल-सा गया है
तेरा आना
आकर चले जाना
तेरा मिलना
मिलकर गुमशुदा हो जाना
आदत-सा है तेरा मुझमे शामिल हो जाना
वाकिफ-सा है तेरा मन में समां जाना
शाम है
और इस के ढलने की आदत नहीं मुझको
कि ख़त्म कर देती है ये तुमसे
मिल पाने की मेरी आरज़ू
वक्त के गुज़रने का इंतज़ार फिर है
कि सुबह फिर आएगी
और यकीनन
एक सुबह तुमसे मिलने की
मेरी आरज़ू को मुकम्मल कर जाएगी।

