Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

GOPAL RAM DANSENA

Abstract


4  

GOPAL RAM DANSENA

Abstract


आंखों का पानी

आंखों का पानी

1 min 353 1 min 353

छलके, छलके हर आँखों से आंखों का पानी।

जो अनमोल था मोल नहीं है, जल रही जिंदगानी।

आश का पंछी इस डाल उस डाल।

रातें हो गयी काली स्याह विकराल।


दिन भी आये लेकर फिर वहीं मातम बेज़ुबानी।

छलके, छलके हर आँखों से आंखों का पानी।

जो अनमोल था मोल नहीं है, जल रही जिंदगानी।

डूबते सूरज की किरणें ज्यों दूर तक आश बंधाये।

तूफान हो हलचल मन में, शांत हो फिर घिर आये।

कभी दुख के आग में तपाया।

कभी गम के समंदर में डुबाया।


मैं पान,बेर के कांटों संग फड़ फड़ वश में नहीं रवानी।

छलके, छलके हर आँखों से आंखों का पानी।

जो अनमोल था मोल नहीं है, जल रही जिंदगानी।

जीवन रस आंसू बन ढरके बदन बसन तर हो रहे।

भभक रहा फफक रहा मन नजर ना जो भीतर हो रहे।

ज्यों पानी बिन मीन अकुलाये।

ज्यों चिंगारी से दावानल सुलग आये।


जल रही मन भीग रही तन बेदर्द ये जीवन कहानी।

छलके, छलके हर आँखों से आंखों का पानी।

जो अनमोल था मोल नहीं है, जल रही जिंदगानी।


Rate this content
Log in

More hindi poem from GOPAL RAM DANSENA

Similar hindi poem from Abstract