STORYMIRROR

Deepak Sharma

Abstract

3  

Deepak Sharma

Abstract

आँख ही से सब.....

आँख ही से सब.....

1 min
255

सामने होकर न फ़रमाया किये 

आँख ही से सब वो बतलाया किये


तू नहीं आया मगर सुन चारगर

देखने बीमार सब आया किये 


है न मुमकिन दीद की ख्वाहिश अगर 

क्यूँ मुस्सविर दिल को भरमाया किये


तितलियाँ भी हार बैठीं ए चमन

जब गुलों के पास वो आया किए 


सुन रहे थे बच्चों की गुस्ताखियाँ 

जाने वो किस बात मुस्काया किये


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract