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Deepak Sharma

Abstract

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Deepak Sharma

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आँख ही से सब.....

आँख ही से सब.....

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सामने होकर न फ़रमाया किये 

आँख ही से सब वो बतलाया किये


तू नहीं आया मगर सुन चारगर

देखने बीमार सब आया किये 


है न मुमकिन दीद की ख्वाहिश अगर 

क्यूँ मुस्सविर दिल को भरमाया किये


तितलियाँ भी हार बैठीं ए चमन

जब गुलों के पास वो आया किए 


सुन रहे थे बच्चों की गुस्ताखियाँ 

जाने वो किस बात मुस्काया किये


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