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Ganesh Chandra kestwal

Inspirational

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Ganesh Chandra kestwal

Inspirational

आज की नारियाँ

आज की नारियाँ

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आज की, नारियाँ, यत्नशीला बनीं।

लक्ष्य को, चूमने, शक्ति हैं वे घनीं। 

कौन सा, क्षेत्र है, नारियाँ छोड़ती। 

बुद्धि के, योग से, धार भी मोड़ती॥१॥


यान को, चंद्र पर, आज हैं भेजती।

व्योम के, भाल पर, ज्ञान वे खोजतीं। 

दृष्टि में, और भी, लक्ष्य है दीखते ।

लक्ष्य को, साधना, लोग हैं सीखते॥२॥


निर्बला, मानते, विश्व के लोग थे।

भाग्य से, जोड़ते,बोलते भोग थे ।

आज वे, हैं लगी, जितने चंद्र को।

शक्ति की, मूर्ति वे, साधतीं भद्र को॥३॥


नीति में, रीति में, वे हुईं सिद्ध हैं।

विघ्न के, पुंज भी, ज्ञान से बिद्ध हैं।

साधना, मार्ग पर, नारियाँ बढ़ रहीं।

आज वे, जीत की, सीढ़ियाँ चढ़ रहीं॥४॥



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