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Ervivek kumar Maurya

Romance

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Ervivek kumar Maurya

Romance

आज भी उसे प्रेम करता हूँ

आज भी उसे प्रेम करता हूँ

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कैसे कहूँ उससे की आज भी उसे प्रेम करता हूँ

हो चाहे महफ़िल में कई लोग फिर

भी नजर भर तुझे देखा करता हूँ

कैसे कहूँ...।

वक़्त ने मेरे तेरे प्रेम को गहरा कर दिया

सबने पहरे लगाये फिर भी मैं और वो बढ़ता गया

मुझे उन्हें कोई फर्क न पड़ा किसी के होने या न होने से

उसने मुझे चाहा और मैं उसे आज भी चाहता हूँ

कैसे कहूँ...।


खबर उनकी, खनक उनकी मुझे जब भी आ जाती थी

सच कहता हूँ प्रेम कसम मेरी रूह उसके पास चली जाती थी

वो मेरे दिल का प्यार सा टुकड़ा था और आज भी है

मैं आज भी उसे अपने दिल में बसा के रखता हूँ

कैसे कहूँ...।


मैंने कभी नहीं चाहा वो मुझसे जुदा हो, शायद उसने भी न चाहा हो

मैने उससे हद से ज्यादा प्यार किया, शायद उसने न किया हो

पर अफ़सोस मुझे उनकी बेवफाई का आज भी है

मैं हरपल टूट-टूट कर आज भी रात में तकिये भिगोता रहता हूँ

कैसे कहूँ...।


मुझे आज भी वो मंजूर है,भले ही मुझसे वो दूर है

मुझे आज भी वो कबूल है,भले ही वो मजबूर है

एक बार मेरी अधूरी कहानियों में प्रेमिका बन जाओ

जिन्हें आज भी बैठ कर तन्हा पढ़ता रहता हूँ

कैसे कहूँ...।


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