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Dr Baman Chandra Dixit

Abstract Classics

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Dr Baman Chandra Dixit

Abstract Classics

आईना और ऐनक

आईना और ऐनक

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 आईना और ऐनक दोनों कांच के हैं
एक से दिखता मगर दूजा दिखाता है
उन्हें देखने के लिए ऐनक लगालेता
खुद को परखना तो आईना देखता हूँ ।।

 सोच समझ से परे दृष्टि भी एक होती
कई दफ़ा वो खुद की सोच बदल देती
आईना ऐनक दोनों चूकजाते जहाँ
बजाय दुशरोके में ख़ुद को देखता हूँ ।।

 आईना मेरा ही है ऐनक भी है मेरी
सोच मेरा ही है अन्तर्दृष्टि भी मेरी
मन की कर ली बहुत दिल को सुने बगैर
निर्णय से पहले अब दिल से पूछता हूँ ।।

 गलत हो गया या फिर गलति कर बैठे
परिणाम देखा मगर कुछ नहीं सीखे
 तीर चला दी मगर लक्ष तो गलत था
निशाने पे तीर तबसे जोखना सीखता हूँ ।।
हाँ ...मैं बार बार आईना देखता हूँ ।।


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