टूटा आईना
टूटा आईना
तोड़ दिया वो आईना जिसे मेरा कहता था
बहला फुसला कर जिसे यारा कहता था
टूटते हुए पुकारा वो, देखा तो मैं पाया
हर टुकड़े में मुझे मैं ही दिखता हूँ ।।
एक चेहरा था अब कई दिखने लगे
ऐब फ़रेब थे जितने सब दिखने लगे
समेटते हुए यादों को चोट लगा जो बैठे
लहू रिसता आज भी उंगली चूसता हूँ ।।
प्यार भी दिखाता दुत्कार भी दिखाता था
ममता दुलार और फटकार भी दिखाता था
टपक पड़े दो बूंदे अश्क़ की , आंखों से
गज़ब है वो नामकिंन स्वाद को चखता हूँ ।।
मुँह मोड़ लेने से आईना पीछा न छोड़ता
देखो न देखो उसे क्या , फिर भी दिखाता
फ़रेब की खंजर का पीठ पीछे का वार
महसूस करता उसका चरित्र देखता हूँ ।।
जमाने से जमी हुई मैल बहुत ही है
वक्त की आंधियों की धूल बहुत भी है
हौले से हथेलियों के कांपते छुअन से
हिलाकर हालातों से मिलना चाहता हूँ ।
हाँ.. मैं बारबार आईना देखता हूँ ।।
