आ गया नव वर्ष
आ गया नव वर्ष
आ गया नव वर्ष लेकर,
जिन्दगी मे नव उमंगे।
करते पखेरू गान नव,
सागर मे मचले नव तरंगे।
नव सुबह हम सभी का,
आह्वान देखो कर रही है।
मेट कर छल छंद सारे,
प्रगति पथ दिखला रही है।
बीते गिले सिकवे दुखो को,
भूल नव संकल्प लेकर।
बिघ्न को ठुकरा के हम सब,
चले सबको साथ लेकर।
गान हो नव छंद हो नव,
भाव नव धारण करे।
दोषो का हो प्रतिकार,
मुखरित वेदना को हम करे।
नारी को हम सम्मान देकर,
दीन जन का दुख हरे।
जाति मजहब त्याग सारे,
वर्ष नव सुखमय करे।
