SRI HARSHA PEESAPATI VENKATA PHANI DURGA
Romance
एक चेहरा
जिसमें थोड़ा रूप
थोड़ा रंग,
सांसो में घुले
थोड़ा इश्क़
थोड़ी मुहब्बत करें।
जन्नत तो नसीब मे नहीं
पर घर दिखा दे,
ख्वाहिशें ज़्यादा नहीं है मेरी
पर अरमान बता दूं,
ऐसा कोई चाहिए
मुझे कुछ चाहिए।
सपने
22-10-2013 Hi...
एक गलत फैसला
शब्द
30-1-13 hindi
बेकसूर
23-07-2015 Hi...
तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था ! तकिये से पूछो बारिश में मैं कितना अश्क बहाया था !
तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो। तुम्हारी आहट पर मुझे कुछ पूर्णता का आभास तो हो।
लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में। लड़का हूँ न allowed नहींं है आजकल के बाजार में।
तुम जाते जाते ले गये.. मुझसे मेरी साँझ की तसल्ली.. तुम जाते जाते ले गये.. मुझसे मेरी साँझ की तसल्ली..
ना आज ये रात बीतेगी ना ही कोई समझ पाएगा , बारिश के इस आलम में जब वो यूं ही चला जाएगा, ना आज ये रात बीतेगी ना ही कोई समझ पाएगा , बारिश के इस आलम में जब वो यूं ही चल...
नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा
एक मद सा है तुम्हारा होना, बहुत कुछ कह जाता है, तुम्हारा मौन। एक मद सा है तुम्हारा होना, बहुत कुछ कह जाता है, तुम्हारा मौन।
तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है। तूने छुआ जो रूह आ गई तो मुझे खुद से भी प्यार है।
पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं। पर ये मुममिन नहीं और इसी तन्हाई में गुमसुन अकेला बैठा मैं।
पात पात प्रतीति परिभाषित, है तुम बिन फागुन अभिशापित। पात पात प्रतीति परिभाषित, है तुम बिन फागुन अभिशापित।
उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई। उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई।
वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक… वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक...
वो आज भी ख्वाबों में आता है!! जगाकर नींद से, यादों के भँवर में फँसा जाता है वो आज भी ख्वाबों में आता है!! जगाकर नींद से, यादों के भँवर में फँसा जाता ह...
जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो। जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो।
प्रीति रजनी जगाने लगती सुर्ख छुअन होती तन-मन में। प्रीति रजनी जगाने लगती सुर्ख छुअन होती तन-मन में।
तुम्हारे अंदर वो तमाम रद्द-ओ-बदल जो तुमने सिर्फ़ मेरे लिए किये उनका आभार जता सकूँ मै तुम्हारे अंदर वो तमाम रद्द-ओ-बदल जो तुमने सिर्फ़ मेरे लिए किये उनका आभार ...
हवा में उड़ते सूखे पत्ते, सच्चे प्रेम के कुछ किस्से गाते पंछी। हवा में उड़ते सूखे पत्ते, सच्चे प्रेम के कुछ किस्से गाते पंछी।
बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा। बेशक तुम मत आना... बस कह देना की आऊंगा।
थोड़ी सी ख़ामोशी मुझे है स्वीकार ... अतिशयोक्ति में डूबा हुआ नहीं चाहिए प्यार ! थोड़ी सी ख़ामोशी मुझे है स्वीकार ... अतिशयोक्ति में डूबा हुआ नहीं चाहिए प्यार !
चलो हम-तुम फिर बैठ के सुबह की चाय एक साथ पीते हैं। चलो हम-तुम फिर बैठ के सुबह की चाय एक साथ पीते हैं।