सपने
सपने
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किस्मत की गाड़ी न रुकने पाए
ना औरत के साथ की बात रुक पाए
न उसके हुस्न के साथ शाम की
न उसके होठों के जाम की
एक शाम की कीमत कुछ
हासिल हो जाए
बातों बातों में रात कट जाए
आँखो आँखो में ज़िंदगी बट जाए
सपने हज़ार लिए हर पल बीतता जाए
अपने हज़ार हर पल जुड़ते जाए
बस ख़्वाहिश की, थोड़े सच्चे अपने हो
कुछ सपने सच्चे अच्छे हो
थोड़ी दोस्ती रंगीन हो
थोड़ी मस्ती बाद को सुस्ती हो
जवानी ऐसी बीते
सपने हक़ीकत हो
