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Madhu Vashishta

Action Classics Inspirational

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Madhu Vashishta

Action Classics Inspirational

सासू मां

सासू मां

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मुझे घर का लगभग कोई भी काम सलीके से नहीं आता था। लेकिन मेरी सासूमां ने कभी कुछ नहीं कहा, टेढ़ी मेढी रोटियां सेंकने पर वो कहती थीं, अपने और मेरे लिए बना दे ,बाकि सब का टिफिन लगा देना, रोटियां मैं बनाती हूं । उस दिन हलवा बनते ही पतिदेव सामने आ गऎ, मेरे द्धारा दी गई हलवे की प्लेट को लेकर अम्मा के पास ले जाकर बोले," लो हलवा पियो "अम्मा ने चखकर कहा ,बहुत अच्छा बना है । थोड़ा पानी ज्यादा हो गया बस। उन्होंने मुझे कभी भी उपहास का पात्र नहीं बनने दिया।


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