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Manu Sweta

Abstract

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Manu Sweta

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इंद्रधनुष

इंद्रधनुष

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इंद्रधनुष सा देखो जीवन

जग में फैला चारो ओर

हर डाली पर मन का पंछी

खूब मचाये शोर


सुख दुख के दो रंग निराले

खींचे जीवन की डोर

प्यार और नफरत के रंगों से

जीवन बना अनमोल


कुछ मस्ती का रंग है देखो

बचपन में दिया घोल

कुछ चिंता का रंग अनोखा

हर आंख से देता बोल


कठिन समय का रंग रे भैया

हर रिश्ता देता तोल

कौन अपना है कौन पराया

सारे भेद देता खोल


हर पल जी लो जी भरकर

जब तक है जीवन का खोल

यही सबक देता है हमको

इंद्रधनुष सा जीवन अनमोल।


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