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Abhishek Singh

Abstract

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Abhishek Singh

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बेवफ़ा ज़िंदगी !

बेवफ़ा ज़िंदगी !

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क्या करूँ तेरा,

ऐ ज़िंदगी।

इस पल ख़ुशी,

तो अगले पल,

ग़म ले आती है।


ना चाहते हुए भी,

मुझको रिझाती है।

बीते वक़्त याद दिला,

मुझको रुलाती है।


तुझको मुझसे वफ़ा नहीं,

या तूँ है बेवफ़ा।

जो पल पल में याद,

उनकी साथ ले आती है।


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