यदि शिक्षक ना होते।
यदि शिक्षक ना होते।
यदि ज्ञान देने वाले शिक्षक ना होते तो,
हम सब बिल्कुल सही बेजान होते तो।
लड़ते झगड़ते जानवरों की तरह रहना,
हम सभी ठोकरें जहान की खाते होते।
सारा दिन बस खाना पीना और सोना,
शायद जानवरों से बदतर जी रहे होते।
यार जीवन रहता कोरा काग़ज़ हमारा,
क़दम क़दम पर अनपढ़ता का अँधेरा।
शिक्षक ना होते तो बर्बाद हम यूँ होते,
बीता हुआ, आज व भविष्य में अँधेरा।
