"ख़ुशी खत़ की"
"ख़ुशी खत़ की"
एक खत जिसके
आने पर मन की
खुशी थी अनंत,
जिसको पढ़कर
मुस्कुराहट का भी
नही हुआ कभी अंत,
आज भी बरकरार है
जब आया उसका खत,
जिसे पाकर मन की
कली भी खिलकर
एक सुंदर फूल सी बन
चुकी थी....
वो खत की खुशी
आज भी अंतर्मन में
बहार भर कर रह गयी।
वो ही एक पल था
जिसे पाकर मुझे मिली
एक अजीब सी खुशी।

