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Shivanand Chaubey

Abstract

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Shivanand Chaubey

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इश्क और समाज

इश्क और समाज

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इश्क दुआ हैं इश्क ख़ुदा है

इश्क प्रेम का उपवन है,

समझ न आये इश्क कभी जो

ऐसा समाज में प्यारा बंधन है।


इश्क है विनिमय भाव प्रेम का 

इश्क धड़कनों की आहट है,

इश्क ही मंदिर इश्क ही मस्जिद 

इश्क इबादत की चौखट है।



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