चेहरे का नूर
चेहरे का नूर
अगर उस चाँद मे
तेरे चेहरे का नूर होता
तो आशिकी कर बैठते उस से भी
उसके छवी पर
हमे भी गुरुर होता...
पर आपके हुस्न के आगे
ये चाँद भी नकारा सा लागता है
तेरी हर हंसी मे चांदनी का बरसना
ये कोई इश्क़ का इशारा लगता है...
तुम कर लेते दीदार मेरी आँखों से
तो जान जाते...
कितने कीमती हो मेरे लिये
तुम्हे ये एह्सास जरुर होता..
अगर उस चाँद मे
तेरे चेहरे का नूर होता!

