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Vivek Madhukar

Inspirational

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Vivek Madhukar

Inspirational

हर सपना तुम्हारा

हर सपना तुम्हारा

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परिस्थिति मनोनुकूल नहीं

शरीर स्वस्थ नहीं

मन स्थिर नहीं

काम-काज रुचिकर नहीं,

आशंका घेरे है भविष्य की

भरी हुई है पोर-पोर में व्याकुलता

कुछ खो जाने का भय हर पल रहता समाये

एक अनबूझ उदासी हर पल रहती है पाँव पसारे.


कुछ ऐसा ही है हाल आज

हर अंतर्मन का,

तिस पर अनजाने विषाणु का

चहुँ ओर छाया आतंक,

और एक अनिश्चितता

आने वाले कल की.


एक गहरी साँस लो,

और ढीला छोड़ दो बदन

होने दो शीतलता का प्रवाह

नस-नस में

आता है हर काली रात

के बाद एक नया सवेरा,

उदित होता आशाओं का

सूरज, छलकाता हर स्वर्णिम किरण

के साथ उम्मीदों का पारावार.


चलो, उठ खड़े हो जाओ

भर फेफड़ों में जोश और आत्मविश्वास

ये दुनिया तुम्हारी,

हर कल तुम्हारा है

सारी खुशियाँ तुम्हारी और

हर सपना तुम्हारा है.


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