Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
बहुत कुछ करीब होता है, बस तुम्हारे सिवा…
बहुत कुछ करीब होता है, बस तुम्हारे सिवा…
★★★★★

© Naayika Naayika

Romance

1 Minutes   7.0K    5


Content Ranking

आकर्षण की सीमा के परे

जब मैं तुम्हें सोचती हूँ

तो तुम मुझे दिखाई देते हो

मेरी रात के चन्द्रमा की तरह

जो मेरे अंतःसागर में हो रहे

ज्वार-भाटे को नियंत्रित किए हुए भी

तटस्थ रहता है अपने आसमाँ में,

विचारों की सीमा से परे

जब मैं तुम्हें सोचती हूँ

तो तुम मुझे दिखाई देते हो

उस दरख्त की तरह

जिस पर मेरे मन की गिलहरी

अठखेलियाँ करने चढ़ जाती है

कभी फल तोड़ लेती है

तो कभी पत्तियों के झुरमुट से

निकलकर चली जाती है

सड़क के उस पार

स्वप्न की सीमा से परे,

जब मैं तुम्हें सोचती हूँ तो

तुम मुझे दिखाई देते हो

नभ में उमड़ आए बादलों की तरह

मेरे यथार्थ की तपती भूमि पर

कुछ भीनी फुहारें बरसाकर

मेरी माटी को सौंधी कर देते हो,

यथार्थ की सीमा से परे

जब मैं तुम्हें सोचती हूँ

तो दूर नहीं रह पाती हूँ

आकर्षण से, विचारों से, सपनों से

बहुत कुछ करीब होता है

बस तुम्हारे सिवा…

 

गिलहरी आकर्षण स्वपन्न

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..