मेरा देश
मेरा देश
ऐसा एक दिन भी ना होगा
जब अपने देश पर गर्व ना हो
सौंधी सी मिट्टी की खुशबू
जैसी दूजी कही ना हो
मुर्गा बांग दे सब जग जाए
सोने की चिड़िया कहलाए
जहाँ गौ माता की पूजा हो
जहाँ राम-रहीम के सुन्दर छंद
ह्रदय को मोहने वाले हो
काले-गोरे का भेद नहीं
बस प्रीत की रंगोली हो
जहाँ हर बालक है राम स्वरूप
और सीता एक-एक बाला हो
जहाँ आजादी का है बोलबाला
जहाँ गद्दारों का हो मुंह काला
जहाँ भारत माँ के नारे हो
नदियों सा पवित्र जहाँ कुछ भी नही
पत्थर भी हो भगवान स्वरूप
सूर्य जहाँ सर्वप्रथम आता हो
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई
जिस देश में हो सब भाई-भाई
ईतना सुन्दर जहाँ जीवन हो
तो अपने देश पर गर्व क्यों न हों
